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Yogini Ekadashi 2026: तिथि, पूजा मुहूर्त, व्रत कथा, पारण समय

सनातन धर्म में एकादशी व्रत भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। वर्ष भर आने वाली 24 एकादशियों में Yogini Ekadashi का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत रखने से व्यक्ति के पापों का नाश होता है, जीवन में सुख-समृद्धि आती है और भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

यदि आप Yogini Ekadashi 2026 की सही तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त, व्रत कथा, पूजा विधि, पारण का समय और धार्मिक महत्व जानना चाहते हैं, तो यहां पूरी जानकारी दी गई है।

Yogini Ekadashi 2026

Yogini Ekadashi 2026 कब है?

वर्ष 2026 में Yogini Ekadashi 10 जुलाई, शुक्रवार को मनाई जाएगी। यह व्रत आषाढ़ कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है।

Yogini Ekadashi 2026 तिथि और समय

Yogini Ekadashi 2026 पूजा का शुभ मुहूर्त

पूजा और व्रत के लिए दिनभर भगवान विष्णु का स्मरण करना शुभ माना जाता है। इस दिन के प्रमुख पंचांग समय इस प्रकार हैं


Yogini Ekadashi 2026 का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यता के अनुसार, Yogini Ekadashi का व्रत करने से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। यह व्रत रोग, दुख और आर्थिक परेशानियों को दूर करने वाला माना जाता है।

कहा जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से हजारों ब्राह्मणों को भोजन कराने और अनेक यज्ञ करने के समान पुण्य प्राप्त होता है। जो भक्त श्रद्धापूर्वक इस व्रत का पालन करते हैं, उनके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है।


Yogini Ekadashi 2026 व्रत पूजा विधि

Yogini Ekadashi के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

इसके बाद पूजा स्थल को साफ करके भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। उन्हें पीले वस्त्र, पीले पुष्प, तुलसी दल, धूप, दीप, चंदन और नैवेद्य अर्पित करें।

पूजा के दौरान “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें तथा विष्णु सहस्रनाम या भगवद्गीता का पाठ करें।

पूरे दिन सात्विक आचरण रखें, क्रोध और नकारात्मक विचारों से दूर रहें तथा भगवान विष्णु का ध्यान करें। अगले दिन द्वादशी तिथि में निर्धारित समय पर विधिपूर्वक पारण करें।

Yogini Ekadashi व्रत कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, प्राचीन समय में अलकापुरी नामक दिव्य नगरी में धन के देवता कुबेर का राज्य था। कुबेर भगवान शिव के परम भक्त थे और प्रतिदिन पूरी श्रद्धा से उनकी पूजा किया करते थे। भगवान शिव की पूजा के लिए प्रतिदिन ताजे और सुगंधित पुष्प लाने का दायित्व हेममाली नामक एक यक्ष को सौंपा गया था।

हेममाली का कार्य था कि वह प्रतिदिन मानसरोवर से सुंदर पुष्प लाकर समय पर भगवान शिव की पूजा के लिए प्रस्तुत करे। वह अपने कार्य में निपुण था, लेकिन अपनी पत्नी विशालाक्षी के प्रति उसका अत्यधिक प्रेम एक दिन उसके जीवन की सबसे बड़ी भूल बन गया।

एक दिन हेममाली अपनी पत्नी के साथ समय बिताने में इतना मग्न हो गया कि वह भगवान शिव की पूजा के लिए समय पर फूल लाना ही भूल गया। पूजा का समय निकल गया, लेकिन फूल नहीं पहुंचे। जब कुबेर को इस बात का पता चला तो वे अत्यंत क्रोधित हो उठे।

उन्होंने तुरंत हेममाली को अपने सामने बुलाया और कहा, “तुमने अपने कर्तव्य की उपेक्षा करके भगवान शिव की पूजा में बाधा डाली है। यह बहुत बड़ा अपराध है। इसलिए मैं तुम्हें श्राप देता हूँ कि तुम कुष्ठ रोग से पीड़ित होकर स्वर्ग से पृथ्वी पर गिरोगे और लंबे समय तक दुख भोगोगे।”

कुबेर का श्राप मिलते ही हेममाली का सुंदर शरीर कुष्ठ रोग से ग्रस्त हो गया। वह स्वर्ग से पृथ्वी पर आ गिरा और जंगलों, पर्वतों तथा निर्जन स्थानों में भटकने लगा। उसका जीवन अत्यंत कष्टदायक हो गया। न उसके पास भोजन था, न आश्रय और न ही कोई अपना।

लंबे समय तक दुख सहने के बाद एक दिन उसकी भेंट महान तपस्वी महर्षि मार्कंडेय से हुई। महर्षि ने अपनी दिव्य दृष्टि से उसके दुख का कारण जान लिया और उससे पूरी बात पूछी।

हेममाली ने हाथ जोड़कर अपने अपराध को स्वीकार किया और महर्षि से प्रार्थना की कि वे उसे इस भयंकर श्राप से मुक्ति पाने का कोई उपाय बताएं।

महर्षि मार्कंडेय ने कहा, “यदि तुम आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की योगिनी एकादशी का व्रत पूरी श्रद्धा, नियम और भक्ति के साथ करोगे तथा भगवान विष्णु की आराधना करोगे, तो तुम्हारे सभी पाप नष्ट हो जाएंगे और तुम इस श्राप से मुक्त हो जाओगे।”

हेममाली ने महर्षि की आज्ञा का पालन किया। योगिनी एकादशी के दिन उसने उपवास रखा, भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा की, उनके मंत्रों का जाप किया और पूरे मन से उनकी भक्ति की।

व्रत के प्रभाव से भगवान विष्णु उस पर प्रसन्न हुए। धीरे-धीरे उसका कुष्ठ रोग समाप्त हो गया और उसका शरीर पहले की तरह स्वस्थ, सुंदर और तेजस्वी हो गया। श्राप से मुक्त होकर वह पुनः अपने दिव्य स्थान पर लौट गया और अपना जीवन धर्म तथा कर्तव्य के मार्ग पर चलाते हुए व्यतीत करने लगा।

Yogini Ekadashi कथा से मिलने वाली सीख

योगिनी एकादशी की यह पौराणिक कथा हमें सिखाती है कि जीवन में भक्ति के साथ-साथ अपने कर्तव्यों का पालन करना भी अत्यंत आवश्यक है। लापरवाही और कर्तव्य की उपेक्षा व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों में डाल सकती है। वहीं, सच्चे मन से किया गया पश्चाताप, भगवान के प्रति अटूट श्रद्धा और धर्म के मार्ग पर चलने का संकल्प जीवन की सबसे बड़ी समस्याओं का समाधान बन सकता है।

धार्मिक मान्यता है कि जो व्यक्ति योगिनी एकादशी का व्रत करता है, भगवान विष्णु की पूजा करता है और श्रद्धापूर्वक इस कथा का श्रवण या पाठ करता है, उसके पापों का नाश होता है, जीवन के कष्ट दूर होते हैं और सुख, शांति, समृद्धि तथा भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।

व्रत के दौरान रखें इन बातों का ध्यान


Yogini Ekadashi 2026 पर क्या करें?


निष्कर्ष

Yogini Ekadashi केवल एक व्रत नहीं बल्कि आत्मशुद्धि, भक्ति और सद्कर्म का पर्व है। वर्ष 2026 में यह पावन एकादशी 10 जुलाई, शुक्रवार को मनाई जाएगी। यदि श्रद्धा, नियम और विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा की जाए तथा निर्धारित समय पर पारण किया जाए, तो धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।


FAQ

Q1. योगिनी एकादशी 2026 कब है?

उत्तर: वर्ष 2026 में योगिनी एकादशी 10 जुलाई, शुक्रवार को मनाई जाएगी।

Q2. योगिनी एकादशी 2026 की एकादशी तिथि कब शुरू होगी?

उत्तर: एकादशी तिथि 10 जुलाई 2026 को सुबह 8:16 बजे से शुरू होगी और 11 जुलाई सुबह 5:23 बजे तक रहेगी।

Q3. योगिनी एकादशी 2026 का पारण कब करें?

उत्तर: व्रत का पारण 11 जुलाई 2026 को दोपहर 1:52 बजे से शाम 4:32 बजे के बीच किया जाएगा।

Q4. योगिनी एकादशी का महत्व क्या है?

उत्तर: धार्मिक मान्यता के अनुसार इस व्रत को रखने से पापों का नाश होता है, भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है तथा सुख-समृद्धि और मानसिक शांति मिलती है।

Q5. योगिनी एकादशी पर किस भगवान की पूजा की जाती है?

उत्तर: इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है।

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